हमने यादो के मोती सजोयें
कुछ तस्बीरों की माला बनाई
और उस से हमने पुराने वक़्त को विदाई दी !!
कुछ पुराने पन्ने कल की शाम में
में डूबा दिए !!
आज एक नयी सुनहरी धुप में अपनी
अपनी आज को जरा नई चमक देने को
हमने कल की सारी रोशनी उस
पुराने वक़्त को लौटा दिया !!
हमने जरा सा , काला काजल लिया
उसे शाम बना के
हमने रात में कल को लौटा दिया !!
आज की चांदनी हमने अब बटोरनी सुरु की हैं
आज का नया किताब पढ़ना सुरु किया हैं !!
आज को गले लगाना सुरु किया
जरा मुश्किल था बदलना
पर पुराने ने हमें सिर्फ यादें दी हैं !!
हमने उसकी एक गाँठ बनाई
और आसुओं के समन्दर में डूबा दी !!
अब जो नया आया हैं
नया सबक दे जायेगा
और देखते -देखते
ये वक़्त भी गुजर जायेगा
कल रहेंगे तो
कल फिर इन पुराने पल को डूबा के
एक नया वक़्त अपनाएंगे
हम रोज नई सूरज
उगाएंगे
हर साल यादो की मोती की खेती करेंगे हर साल उनकी माला बना के
पुराने वक़्त को विदा करेंगे !!
और नए वक़्त को गले लगाएंगे


प्रिया मिश्रा :)

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