कौरव संघार

कौरव राज्य
जब चमका था
धरती पर न्याय तब पनपा था
राजा शांतनु के राज्य में
सब मंगल सब कुशल था||

आई फिर भीष्म  की बारी
पशुराम शिष्य ने शक्ति अर्जित की
पर निकले वो भी
मनुष्य अभिमानी
कर डाली एक भूल अनजानी
ले आये हर को
नारियो को
एक रह गयी उसमे
अपमानित
शार्प तभी कौरव कुल को लगा था
तभी तो दुर्योधन जन्मा था
एक और श्राप लगाने को
कौरव कुल को मिटने को
लिए जन्म दुरुयोधन ने
नारी अपमीनित कर जाने को
भरी सभा में कुलवधू
उतारी,
निनानवे भाई बैठे थे
सभा सारी मौन थी
चीख रही थी
द्रोपदी ,
जो नारी अर्धनग्न थी
भरी सभा  जो मौन थी
उसे शार्प नारी का लग गया
फिर न ऊगा चमका सूरज
अन्धकार,
 कौरव समाज डूब  गया
हो गयी सभा मौन
हो गया नाश कुरु कुल का
एक नारी का  शार्प ले
तू कहा तक मनुष्य जायेगा
जहा भी जायेगा
मारा ही जायेगा
ले तुझे मैं
शार्प देती
मेरी मन जो चोट हैं
वो चोट तू  भी खायेगा
जो नारी का अपमान करेगा
वो मनुष्य मारा जायेगा
अंत तेरा फिर भी न होगा
तू तड़पता रह जायेगा
जैसे कौरव मरे गए थे
वैसे तेरा विनाश भी आएगा ||

प्रिया मिश्रा :)

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