तेरी गली से मैं रोज गुजरता हूँ !! और तेरे घर के पास जा के अपनी यादो के
गुलदस्ते सजाता हूँ !! अब तालो पे जाले लग आये है !! जैसे हमारे रिस्तो में
लगे है !! और दिवार के बीचो बिच एक नन्हे पौधे ने जन्म लिया है अभी अभी
आँख खोली है उसने !! जैसे हमारे बिच दूरियों का बीज उग आया था !! लेकिन एक
चीज आज भी वैसे ही है तुम्हारे कमरे खिरकिया आज भी बंद रहती है पहले की तरह
कोइ आ जा नहीं सकता , तुम्हारे दिल की तरह इसमें भी !! और मैं बेवजह ही
यहाँ रोज आके दरवाजा खटखटाता हूँ आदतन !!
प्रिया मिश्रा
प्रिया मिश्रा
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