अकेले की दिवाली ( मार्मिक )
एक आहट हुई थी !! दरवाजा खोला तो बस एक संदेसा था !! इस बार नहीं आऊंगा छुट्टी रद्द हो गयी !!
दुश्मनो ने फिर हमला कर दिया हैं !! बस इतना ही लिखा था और बाकि का पन्ना कोरा था सिर्फ एक नाम था तुम्हरा रवि !! और जवान की बीवी ने इस बार फिर अकेले ही दिवाली मनाई !! ये हर साल होता था !!सारा हिंदुस्तान जगमगाता था !!जब एक जवान अपने घर से दूर और बहोत दूर अकेले में अपनों को याद करके दिवाली मनाता था !!
प्रिय मिश्रा ||
एक आहट हुई थी !! दरवाजा खोला तो बस एक संदेसा था !! इस बार नहीं आऊंगा छुट्टी रद्द हो गयी !!
दुश्मनो ने फिर हमला कर दिया हैं !! बस इतना ही लिखा था और बाकि का पन्ना कोरा था सिर्फ एक नाम था तुम्हरा रवि !! और जवान की बीवी ने इस बार फिर अकेले ही दिवाली मनाई !! ये हर साल होता था !!सारा हिंदुस्तान जगमगाता था !!जब एक जवान अपने घर से दूर और बहोत दूर अकेले में अपनों को याद करके दिवाली मनाता था !!
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