" तू चला चल मुसाफिर "

तू चला चल मुसाफिर
एक मंजिल तुझे पुकारती हैं
वो पर्वतो से गुजरती है
बादलो पे रहती हैं
वो तेरा एक सपना हैं
जो तेरे तकिये के निचे सोती हैं
तू थक मत
तू रुक मत
 तू चला चल मुसाफिर
एक मंजिल तुझे पुकारती हैं ||

तेरा पथ कठिन हैं
पर तू कहाँ हारा है
तेरे कदम के निशान जहाँ होंगे
वो सारा जहाँ तुम्हारा हैं
तू थक मत
तू रुक मत
तू चला चल मुसाफिर
एक मंजिल तुझे पुकारती है ||

तू कहा अकेला हैं
तेरे साथ ये शाम की बेला हैं
सुबह की रौशनी हैं
किरणों का मेला हैं
नदिया साथ हैं तेरे
पंछियो का डेरा हैं
तू थक मत
तू रुक मत
तू चला चल मुसाफिर
एक मंजिल तुझे पुकारती हैं ||

प्रिया मिश्रा :)
 

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