तुम्हारा शहर

तुम्हारे शहर की बात ही कुछ ऐसी है |
जितना जानो कम पड़ता है |
इतनी भीड़ में,
 मैं भी गुम गया हूँ|
खोना चाहता था
लेकिन भीड़ में नहीं
तुम्हारी बातों में
और आँख में शहर की धूल चली गयी
अब बरसती रहती है
लेकिन बादल छट
के इंद्रधनुष नहीं निकलता ||

प्रिया मिश्रा :)

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