क्यों सोचे कोइ
किसका कौन होगा
ये तो वक़्त बताएगा
आज भले ही वो मौन होगा ||
घड़ी दो घड़ी की बात पे,
क्या यकीं कर ले
खुद के पैरो में जान होगी
तो चार कदम चल पाएंगे
तेरी बैसाखियो से,
कंधे तेरे भी तो झुक जायेंगे
तू डरना मत
मैं न भी चल पाई तो ,
तुझे संभाल लुंगी
ये वादा हैं
कल भी ये वादा
निभा लुंगी ||
प्रिया मिश्रा :)
Good one
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