" मैं देर तक ठहरा रहा "

न तुम आये
न आने का कोइ वादा किया
घंटे गुजर के साल हो गए
मैं वही टकटकी लगाए रहा
मैं देर तक ठहरा रहा ||

तुम तक गयी थी जो हवा
छूके मुझे ,
वो हवा मुझ तक भी आई थी
लेकिन तुम्हारी खुसबू नहीं आई
मैं हवा से लड़ता रहा
मैं देर तक ठहरा रहा ||

मौसम बदला
बरसात बदल के
ग्रीष्म आया
लेकिन सावन आखों से बरसता रहा
मैं रोता नहीं था,
मैं बूत बन गया था
सब कुछ ठिठक गया
मौसम कई बदल गए
मैं देर तक ठहरा रहा ||

मुझे तुम्हारी यादो ने
पहरे में रखा
मैं कैदी था
मैं रोज तिनका- तिनका
मरता रहा |
तुम न आये ,
न तुम्हारी यादें आई
मैं वही देर तक ठहरा रहा ||

प्रिया मिश्रा :)

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