"रविवार"

रविवार का दिन
सोने का सबसे अच्छा मौका
लेकिन ये क्या बात हो गयी
पडोशन की सुबह - सुबह
की कीच - कीच शुरू हो गयी
मैं भी गया खिड़की खोली
उफ़ ये क्या गजब हो गया
सामने वाली खिड़की पे
कोई मेनिका सी कन्या
बाल बना रही थी
पता नहीं बाल बना रही थी
या मुझे उलझा रही थी
अब कम्बख्त कौन सोने जाता हैं ||

जल्दी - जल्दी
पार्लर गया
थोड़ा बन- ठन के
बाहर आया
पहली बार
मैं जंगली नहा के आया
नहीं - नहीं
गलत गए हैं आप ,
नहाता तो मैं रोज था
आज साबुन लगे
फेस वाश लगाया 
तो पता चला नहाना क्या होता हैं
वरना  मुझे तो पता था की
बस पानी बर्बाद होता हैं ||

अब खुसबूदार होक
नए पडोसी का फर्ज
निभाने चला
सोचा ,
दिखा दूँ ,
हम अकेले पडोसी हैं
जो आपकी खैरियत पूछते हैं
वो देखती ही मुझे मुस्कुराई
फिर शर्मा जी की भी
हसीं आई ,
मैं समझ गया
मैं अकेला नहीं हूँ
कई हैं इस मुहल्ले में
जो पहले उठ जाते हैं ||

मैंने उसे कहा ,
कोइ तकलीफ होतो हमें कहियेगा
और उसने कहा, अच्छा ठीक हैं
पर शर्मा जी  को ये बात समझ नहीं आई
और बोल बैठे ,
आप इनकी चिंता न करे
ये हमारे दोस्त की बेटी हैं
समझ गया ,
पडोशी ससुरा त्यार हो गया
सुरु होते ही लव स्टोरी में
शक्ति कपूर आ गया
अब आउउउ कह के जायेगा
लगता हैं ,
ये दिल मुझे मरवाएगा
अब खिसक लो
राम बाबू ,
ये शेहरा तेरी किस्मत नहीं
तू और कुछ देर रहा
तो तेरा पोपट बन जायेगा ||

लेकिन खिड़की से
से छुप - छुप
कर उसे देखने की कला आज भी जारी हैं
अब रबिवार को
और जल्दी उठ जाता हूँ
वो अपने बाल बनाती
और अनुलोम - बिलोम के
बहाने उसे देखता हूँ
कभी दया आँख खोलता हूँ
कभी बयां,
इस अनुलोम विलोम में
साँसे  ऊपर निचे नहीं जाती
रुक जाती हैं ||

शेहरा अब भी नशीब नहीं
पर रविवार स्पेशल हो गया
कम्बखत ये रविवार एक ही क्यों आता हैं ||

प्रिया मिश्रा :)


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