"मैं एक कवी हूँ "

एक कवी
अपने विचार को प्रकट करके
सवछंद नहीं रह पता
वो सुखी
होते हुए भी
अगर दुःख पे कविता लिखे दे
लोग पूछ ही देते हैं
क्या हुआ भाई ??

अकसर प्रेम में
न पड़ा कवी ही
प्रेम पे जायदा लिखता हैं
और लोग पूछ बैठते हैं
किसके चककर में पड़ गए ??

अब कवी ये नहीं कह पता
भाई ,
मैं कवी हूँ
मेरे पास भावनाये हैं
किसी को रोता
देख मेरा  कलम रोने लगता हैं
किसी को हस्ते देख मेरा कलम हॅंस देता हैं
ये खुद को नहीं जीता
ये सबसे जीता हैं
बस ये कलम
हमें आपसे अलग करता हैं
बाकि जैसे आप
वैसे हम ||

प्रिया मिश्रा :)

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