मौसम चाहे जो भी हो |
ये कलयुग में |
सर्दी हमेसा रहती हैं |
तभी तो धमनियों का रक्त जम जाता हैं |
और जब पिघलता हैं |
तो पानी हो जाता है|
आज कल गर्मियों वाली बात नहीं |
आज कल खून में वो उबाल नहीं ||

प्रिया मिश्रा :)
 

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