"शायद मैंने आपको कही देखा हैं "

सोचा हैं
समझा हैं
फिर जाके
एक बात जुबान पर आई हैं
जाने पहचाने से लगते हो
शायद मैंने आपको  कही देखा हैं ||

इस जनम
हम अजनबी हैं
पर किसी और जनम में
मेरे हिर्दय ने तुमसे एक नाता जोड़ा होगा
तभी तो इस जन्म भी वो
तुम्हे देख के,
वो उफान पे आ गया
जिससे रुकते - रुकते बात जुबान पे आ गया हैं
बुरा न मानियेगा
लेकिन मैंने आपको कही देखा हैं ||

शायद फूलो के रंगो में छिपकर
शायद ओश की बून्द में
या कही कोइ हवा
आपसे होकर गुजरी हैं
जिसने मुझे
ये एहसास दिलाया हैं
की आप अजनबी नहीं
अपने हो ,
बुरा न मानियेगा
हम दिल्लगी नहीं करते
लेकिन मैंने आपको  कही देखा हैं ||

यूँ तो रोज ही
मिलते हैं हजारो से
लेकिन हजारो में वो बात नहीं
जो बात आपमें हैं
तभी तो बात पे बात आई हैं
तो कह देते हैं
बुरा न मानियेगा
ये और बात हैं की हम ,
आँखों के गुलाम हैं
पर मेरी रूह ने
आपको पहले  कही देखा हैं ||

प्रिया मिश्रा :)

Comments

Popular posts from this blog