" कुछ ख्वाब अधूरे से हैं "

कुछ ख्वाब अधूरे से है
अभी समंदर का शाम देखना बाकि है
किसी की मुस्कराहट में वो रात 
देखना बाकि है 
अभी - अभी तो 
एक ख्वाब पूरा हुआ 
अभी  कई रातो तक 
जगायेंगे ,
अभी ,
कुछ ख्वाब अधूरे से है || 

एक किरण सुबह - सुबह की अधूरी है 
एक रात पूरा होक भी अधूरा है
कुछ तारे  अधूरे है
कुछ बात अधूरी हैं 
कुछ ख्वाब अधूरे है|| 

अभी पैरो में थकान नहीं आ सकती 
अभी आखों में नींद नहीं आ सकती 
अभी सुबह की रौशनी में 
खुद को निहारना हैं 
एक काम खुद का भी हैं 
अभी खुद के वजूद को तराशना है 
अभी बहोत कुछ बाकि है
 अभी बहोत कुछ अधूरा है 
एक  ,
ख्वाब अभी - अभी पूरा हुआ हैं 
अभी ,
कुछ ख्वाब अधूरे है || 

प्रिया मिश्रा :)

 

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