अकेले हैं तो क्या गम हैं
अकेले हैं तो क्या गम है
किसी के यादों का सिसिला साथ चलता है
एक बादलो का करवा साथ चलता है
थोड़ा - थोड़ा ही सही
हर लम्हा साथ चलता है ||
अकेले हैं तो क्या गम है
चाँद भी तो अधूरा और अकेला है
सूरज भी तो अकेला
चमकता हैं शान से
वो पुरे आसमान में अलबेला है
हम भी सूरज बन जायेंगे
कही प्रकाश
बन के जगमगाएंगे
अकेले हैं तो क्या हुआ
किसी अकेले का साथ निभाएंगे
सभी अकेले ही रहते है
दिखावे भर की ये महफ़िल है
जिस ,
ग़ज़ल में महबूब का जिक्र होता है
उसका भी
एक - एक शब्द अकेला होता है
हम अकेले शब्दों से इतिहास बनाएंगे
अकेले थे अकेले चलते जायँगे
प्रिया मिश्रा :)
Wah excellent
ReplyDeletethank you g :)
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