"बहुत करीब से देखा हैं तुम्हे "
बहुत करीब से देखा हैं तुम्हे
तुम चाँद सी सुन्दर हो
पर तुम्हे चाँद नहीं कह सकता
तुममे कोइ दाग नहीं
तुम धवल हो
तुम सुन्दर हो ||
तुम्हारे गेसुओं की
खुसबू महसूस की हैं
पर इन्हे फूल नहीं
कह सकता
इनमे रात जैसे गहराई हैं ||
बहोत करीब से देखा हैं
तुम्हे ,
पर जानने की ईक्षा
अभी बाकि हैं
क्यों समेट लेते हो खुद को
मुझसे ,
की मैं तुम्हारा कवी हूँ
और ,
तुमपे कोइ कविता लिखना अभी बाकि हैं ||
प्रिया मिश्रा :)
बहुत करीब से देखा हैं तुम्हे
तुम चाँद सी सुन्दर हो
पर तुम्हे चाँद नहीं कह सकता
तुममे कोइ दाग नहीं
तुम धवल हो
तुम सुन्दर हो ||
तुम्हारे गेसुओं की
खुसबू महसूस की हैं
पर इन्हे फूल नहीं
कह सकता
इनमे रात जैसे गहराई हैं ||
बहोत करीब से देखा हैं
तुम्हे ,
पर जानने की ईक्षा
अभी बाकि हैं
क्यों समेट लेते हो खुद को
मुझसे ,
की मैं तुम्हारा कवी हूँ
और ,
तुमपे कोइ कविता लिखना अभी बाकि हैं ||
प्रिया मिश्रा :)
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