"मैं रात कहूं तुम दिन समझ लेना "

मैं रात कहूं तुम दिन समझ लेना
मैं ना कहूं तुम हां समझ लेना
एक बार मेरी इंकार को
शब्दों में न टटोलकर
आँखों में देख लेना
जवाब जो मिले
उसमे खुद को ढूंढ लेना
मैं न कहूं तुम हाँ समझ लेना ||

मैं कहूं की नहीं हैं फ़िक्र तुम्हारी
तुम दरवाजे पर लगी उस चौखट,
नजर डालना
कई बार पाँव के निशान मिलेंगे
तुम उस निशान से
सब भेद समझ लेना
मैं न कहूं तुम हाँ समझ लेना ||

मैंने नहीं किया इन्तजार ऐसा जो कहूं मैं ,
तुम मुस्कुरा देना
और मेरी जगती आँखों में वो अनकहा प्रेम देख लेना
जो चुभती हो तुमको बातें मेरी
तो उन शब्दों में मेरा दर्द देख लेना
एक आह मिलेगी
तुम वो बात समझ लेना
जो ना कह पाई कभी तुमसे मैं
मैं रात कहूं तुम दिन समझ लेना
मैं ना कहूं तुम हाँ समझ लेना ||
प्रिया मिश्रा :)

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