मैं जन्मी चाहे जिस कुल में
 हर कुल में मेरा नाम होगा
एक  कुल की  रौशनी
दूसरे कुल को भी जगमगाएगी
हर नारी में वो शक्ति
वो बिश्वशक्ति कहलाएगी ||

आज बंद कमरे में रहती
कल सारा बिश्व मेरा धाम होगा
एक धाम में पुण्य का लेखा
एक धाम में पाप का लेखा
जब छुएगा तू
महिसासुर बन के
वो कालरात्रि कहलाएगी
हर नारी में  वो शक्ति
वो बिश्वशक्ति कहलाएगी ||

नाम उजागर मेरा
काम उजागर मेरा
कर लो स्मरण
उस फूल को
जो सुख के भी
खुसबू फैलाएगी
हर नारी में वो शक्ति हैं
वो बिश्वशक्ति कहलाएगी ||

मुझे नजरो से मत आको
मत कद से मेरा सम्मान करो
मेरी आभा उज्वल हैं
कुछ उसका भी ध्यान करो
अँधेरा तेरा भी जायेगा
जब प्रकाश तुझे छू जायेगा
मैं तेरे अँधेरे का सूरज
तेरे रोम - रोम में
किरण भर जाएगी
हर नारी में वो शक्ति हैं
वो बिश्वशक्ति कहलाएगी ||

चाहे जितना तिरष्कार करो
चाहे जितना इंकार करो
वो जगतजननी ही कहलाएगी
हर नारी में वो शक्ति
वो बिश्वशक्ति कहलाएगी ||

कलयुग जब तांडव करेगा
जब बिनाश मनुष्य पे छायेगा
वो करेगा आँचल मैला मेरा
और पतन को जायेगा
उसकी आँखे भ्रमित होंगी
बिष सर चढ़ जायेगा
तब होगा काली का जन्म
द्रोपदी न अब हारी  जाएगी
हर नारी में  वो शक्ति
वो बिश्वशक्ति कहलाएगी ||



प्रिया मिश्रा :)


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