घर के कोने -कोने में
खामोसी थी
बस एक लालटेन रोशन थी
रखवाली करती हुई
उसकी जिसने
अपनी फर्ज से शायद ही मुँह मोड़ा हो ,
एक आहट हुई
दरवाजा भी खुला
रोशनी हलकी आ रही थी !! घर में कोइ आया
और अपनी लापरवाहियों के लिए माफ़ी
मांगने लगा
वो रोता रहा
लेकिन कमरे की खामोसी
बरक़रार थी
क्यूंकि
तस्बीरे बोला नहीं करती
सिर्फ सुना करती हैं !!
कुछ कहा नहीं करती
फिर तो ये माँ की तस्वीर
थी, ये कैसे शिकायत करती !!
प्रिया मिश्रा :)
खामोसी थी
बस एक लालटेन रोशन थी
रखवाली करती हुई
उसकी जिसने
अपनी फर्ज से शायद ही मुँह मोड़ा हो ,
एक आहट हुई
दरवाजा भी खुला
रोशनी हलकी आ रही थी !! घर में कोइ आया
और अपनी लापरवाहियों के लिए माफ़ी
मांगने लगा
वो रोता रहा
लेकिन कमरे की खामोसी
बरक़रार थी
क्यूंकि
तस्बीरे बोला नहीं करती
सिर्फ सुना करती हैं !!
कुछ कहा नहीं करती
फिर तो ये माँ की तस्वीर
थी, ये कैसे शिकायत करती !!
प्रिया मिश्रा :)
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