|| आत्मशक्ति  ||

आत्मशक्ति अर्थात आत्मा की शक्ति |
ये वो शक्ति हैं जो आपको हारने नहीं देती | आपके बिश्वाश को जगाये रखती हैं | आपको आत्मनिर्भर बनाये रखती हैं | इस अमूल्य शक्ति को बाहरी प्रभावों से शक्तिहीन न करे | ये शक्ति आत्मा ज्ञान की देन है | परमात्मा की देन  हैं | इसे स्वम के स्वार्थ वस या दुसरो के सस्वार्थ के लिए नष्ट ना करे |
इस शक्ति का अपना एक आधार है | आप जितना दुसरो के साथ अच्छा करेंगे | जितना अच्छा सोचेंगे खुद के लिए और दुसरो के लिए ये शक्ति बढ़ती जाती हैं और आपके जीवन में उस वक़्त आपका साथ देती हैं जब आपकी परछाई आपका साथ छोड़ देती हैं | ये आपको प्रकाश की और ले जाती हैं | आपका मार्गदर्शन करती हैं | एक माँ की भांति आपका पालन करती हैं | पर जैसे ही हम नकारात्मक चीजों से घिर जाते हैं | नकारात्मक सोच रखने लगते हैं , ये शक्ति नष्ट होने लगती हैं और उसी परमात्मा के पास लौट जाती हैं जिसने ऐसे दिया था | तो ध्यान रखे जीवन में कोइ ऐसा कार्य न करे जिस से आपकी आत्मशक्ति नष्ट हो क्युकी ये सबसे पहला आपका नुकशान हैं |
और एक व्यक्ति का नुकशान उसका परिवार का नुकशान है | समाज की हानि है | देश की हानि है | जरुरी नहीं की हम की हम कोइ नेता या अभिनेता बन के ही देश की सेवा करे | खुद की शक्ति को बचा के उसे सही तरह प्रयोग करके भी हम देश और  अपने परिवार के लिए कुछ कर सकते हैं | खुद के लिए कुछ कर सकते है |
तो देश को ऊपर उठाने के लिए पहले खुद को ऊपर उठाइये फिर अपने परिवार को | फिर अपने आस - पास को उसके बाद खुद ही देश का निर्माड में आपका सहयोग होने लगेगा |
याद रखे आप खुद वो छोटी इकाई हैं जो मिलके देश को करोड़ बनता और ब्रह्माण्ड को अनंत बनता हैं | आप सागर में बून्द ही सही पर सागर का हिस्सा हैं | अगर एक  बून्द बिष सागर में पड़ जाये तो वो बून्द से बून्द मिलकर पुरे सागर और महासागर  को भी बिशवान बना सकती हैं |
आप वो बून्द न बने बल्कि अमृत बने जिसे हर कोइ लेना चाहे, जिसे हर कोइ महसूस करना चाहे |
अब ये आपके  हाथ में हैं
बिष बनना हैं या अमृत ||

सुप्रभात
जय हिन्द
जय भारत ||

प्रिया मिश्रा :)

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