टूटी झोपडी ( लघु कथा )


टूटी सी झोपड़ी
उस से टपकता पानी
धीमी लालटेन , और घर में खाली बर्तन
बस इतने से सामान से सजा था
राम का घर !!
अब वो बूढ़ा हो चला था !! पर उसकी यादो में अब भी वही छोटे और मुस्कुराते उसके बच्चे थे !! ऐसा नहीं था की राम के संस्कारो में कोइ कमी थी पर हवा कब रुख मोड़ ले कौन जनता हैं !! ऐसा ही राम के साथ भी हुआ उसके बच्चे अपने काम में व्यस्त हो गए बीवी गुजर गयी और घर खामोश हो गया
बिलकुल वीराना सा !! बस कभी- कभी किसी के कदमो की आहट दरवाजे तक आती थी और राम को नींद से जगा देती थी !! ये आहट उसके यादो की थी जिसमे उसके बच्चे बस्ते थे हस्ते खेलते हुए !! पर ये सिलसिला भी ज्यादा दिन न चला !! इस बार आहट तो आई पर राम नींद से न जगा वो सो गया फुर्सत की नींद !!


प्रिया मिश्रा :)

Comments

Popular posts from this blog