घर

घर क्या हैं ?
 ईंट पत्थर  का मकान |
या जहाँ आप सुकून महसूस करते हैं |या  जहाँ  महसूस कर सके की  आप सुरक्षित हैं कोइ ऐसी जगह |
या जहाँ प्यार बस्ता हो एक परिवार बस्ता हो ऐसी जगह | सोचे ?
मेरे ख्याल में घर एक ऐसी जगह हैं जहा प्यार बस्ता हैं | कोइ रहता हो उसमे,  जिसने उस मकान को घर बना दिया हो | वो कोइ भी रिश्ता हो सकता हैं | जहाँ कोइ आपका इन्तजार करता हो | जहाँ रिस्तो की सही परिभसा मिलती हो | कोइ हो जिसके आँचल में बैठ के आप सुकून महसूस कर सके | कोइ हो जिसके कंधे आपकी ताकत हो |
कोइ हो जिसका  चेहरा आपको मुस्कुराना सीखा दे | कोइ हो जिसके हाथो की मिठास आपका भूख बढ़ा दे | कोइ हो जो आपको समझ पाए | जो आपके जीवन का अन्धकार मिटा दे ऐसा परिवार मिला के बनता हैं घर |
तो मकान और घर में फर्क समझे |
खुद को प्यार करे और दुसरो को प्यार दे | खुद का आदर करे और दुसरो को भी आदर दे | क्योंकी जो खुद का सम्म्मान नहीं करता उसका कोइ सम्मान  नहीं करता | और जो खुद के परिवार  का आदर नहीं करता उसे कोइ और परिवार आदर दे भी नहीं सकता |
तो अपनों के प्यार के साथ अपने घर को बनाये प्यार से |
मकान को रहने दे खाली। ..
और दिलो को  भरे प्यार से घर के लिए घरवालों के लिए |
 आज के दिन की शुरुआत की साथ खुद के साथ एक वादा करे की आज आप कुछ अच्छा करेंगे क्युकी कल किसने देखा हैं ||

सुभदिवश
वन्देमातरम
जय हिन्द
जय भारत ||

प्रिया मिश्रा :)

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