पहली बार जब
इश्क का कारोबार चला था
हवा जरा तेज था
जब नदी को उस से प्यार हुआ था !!
दोनों मिले एक ख्वाब देखा
पर हवा कहा ठहरता हैं
उड़ गया लेके
नदी का बहता पानी
नम हवा भरी सा
न ठहरा न रुका
जा के सिमट गया बादल में
और बरस गया प्यार बन के ,
हो गयी धरती
गीली - गीली
ओढ़ी उसने चादर धानी
करके नदी की चादर मैली !!


प्रिया मिश्रा :)

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