बंधन क्यों ||

मुझे जन्मा तूने बड़े लाड से
फिर ये बंधन क्यों |

क्यों पहनाये पैरो में पायल
क्यों डाला  हाथो में चूड़ियाँ
क्यों कलम न पकड़ाया
ऐसा भेद - भाव क्यों ?
ये बंधन क्यों ?

क्यों मैं आजाद नहीं
क्यों मैं घिरी रही
काले  बादलो से
क्यों मेरा वो इंद्रधनुष नहीं
ऐसा भेद - भाव क्यों ?
ये बंधन क्यों ?

क्यों मैंने ही जाना स्वीकार किया
क्यों खुद के आँगन का त्याग किया
क्यों पुरषो ने छोड़ा नहीं अपनों का आंगन
क्यों मैंने ही जलना स्वीकार किया
क्यों मुझे ही बिदा किया
क्यों पुरषो को घर में रखना स्वीकार किया
ऐसा भेद - भाव क्यों
ये बंधन क्यों ?

क्यों मैंने पढ़ना नहीं सीखा
क्यों मैंने जीना नहीं सीखा
ये पायल की बेड़िया मुझे ही क्यों
ये चूड़ियों की जंजीरे मुझे ही क्यों
ऐसा भेद - भाव क्यों ?
ये बंधन क्यों ?

क्यों मैं जलती रही
क्यों  हैवानियत मुझे हर बार कुचलती रही
क्यों कोइ स्वर न फूटे
क्यों हर बार मैं मरती रही
मुझे जन्मा था तूने बड़े लाड से
फिर ये अपमानित  मौत क्यों ?
ये बंधन क्यों ?

प्रिया मिश्रा :)



 

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