सिगरेट  धीरे - धीरे
खुद को खाता रहा
कुछ सुलगता रहा सीने में ,
और धुएं में सिमटता रहा |
जब बुझ गया पैरो तले
आ गया
हर बार वो पिस्ता रहा
हर बार धुँआ रिस्ता रहा

प्रिया मिश्रा :)

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