भगवान् की खोज ||
एक कलयुग के सताए हुए सज्जन भगवान् की खोज में निकले घर से बहोत दूर चलने के बाद उनको बड़ी जोर की प्यास लगी , आस पास देखा कुछ दूर पर एक घर था, वह जाकर दरवाजा खटखटाने पर एक महिला आई और उनके आग्रह पर उनको पानी पिलाया || सज्जन फिर निकल चले आगे बढ़ते गए कुछ देर बाद उनको बड़ी तेज भूख आई , उन्होने भिक्छा से अपनी भूख शांत की || अब थके हुए सज्जन बिश्राम करने पेड़ की छाया में पेड़ के पत्ते बिछा के सो गए || जब उठे तो फिर अपनी यात्रा सुरु की || कुछ दूर जाने के बाद उन्हें एक बूढ़ा आदमी मिला जो अपनी बैल - गाड़ी ले जा रहा था , उसने सज्जन की अपनी बैल गाड़ी में बिठा लिया और कुछ उनकी सहायता की यात्रा में , सज्जन फिर आगे बढ़ गए || और चलने लगे , एक दिन सज्जन को रस्ते में एक चमकता हुआ पत्थर मिला सज्जन ने उठाया देखा और बहोत देर सोचने के बाद उसे फेक दिया वो एक गरीब की कुटिया में जा गिरा , वो गरीब उसे देख कर उनको प्रणाम करने लगा , सज्जन बड़े आश्चर्य से उसे देखते हुए आगे बढ़ गए || एक सज्जन को भिक्छा जरा जायदा मिल गयी , सज्जन ने कुछ खाया और फिर उसे किसी और को दे दिया , वो आदमी सज्जन की तरफ देख के प्रणाम कर के बोलै जय प्रभु , सज्जन ने उसकी तरफ भी आश्चर्य से देखा और आगे बढ़ गए ||कुछ दूर चलने के बाद सज्जन को प्यास लग आई और बड़ी तेज भूख भी पर यहाँ कोइ घर नहीं था ये जंगल था , सज्जन ने देखा थोड़ी दूर पे एक नदी बह रही है और एक लगा हुआ केले का पेड़ भी हैं , सज्जन ने वहाँ से केला खाया और पानी पिया || सज्जन महाराज को चलते चलते कई वर्ष निकल गए थे पर उनको भगवन न मिले थे || सज्जन बड़े दुखी हुए और आत्महत्या के लिए नदी ढूंढ़ने लगे , नदी ढूंढते -ढूंढ़ते वो एक नदी किनारे लगे हुए आश्रम में चले गए || वहाँ उन्होंने जाकर एक साधु महाराज से पूछा की आप किसकी साधना करते हैं , साधु महाराज मुस्कुराये और बोले ईश्वर की आराधन करते हैं हम || सज्जन ने उनसे पूछा की क्या आपने ईश्वर को देखा हैं , महाराज मुस्कुराये और उन्होंने बोला हा मैंने देखा हैं || सज्जन बहुत खुस हुए और महाराज से बोले तो प्रभु मुझे भी ईश्वर के दर्शन कराये || महाराज उनको लेकर चल पड़े उसी रस्ते पर जिस रस्ते से सज्जन आये थे , सबसे पहले वही नदी और वो केले का पेड़ आया , सज्जन उसे देख साधु महारज से बोले प्रभु इसी नदी ने मेरी प्यास बुझाई थी और इसी पेड़ की मैंने फल खाया था || साधु महाराज ने कहा देखो सज्जन ये केले के पेड़ ने तुम्हारी भूख मिटाई और इस नदी ने तुम्हारी प्यास बुझाई , ये दोनों ही तुम्हारे लिए अन्नपूर्णा हुई और वो देवी हैं || इन्हे प्रणाम करो वत्स || ये भगवन हैं , वो महिला जिसने तुम्हारी प्यास मिटाई वो भी एक देवी थी , जिस गाड़ीवाले ने तुम्हारी यात्रा में मदद की वो भी भगवन था || उसे प्रणाम करो उसका अभिनन्दन करो || जिसने तुम्हे भिक्छा दी उसे प्रणाम करो वो भगवान् थे उसे प्रणाम करो || जो चमकता हुआ पत्थर तुम्हे मिला था वो हिरा था जो तुमने गरीब की कुटिया में फेका , गरीब ने उसे पाकर भगवन को प्रणाम किया और तुम्हे भी क्युकी उस समाया तुम उसके लिए भगवन थे || जब तुमने उस गरीब को भिक्छा दी उसने तुम्हे प्रणाम किया || इन सारी बातो का एक ही मतलब हैं की भगवान कण - कण में बसते हैं || उन्हें ढूंढो मत हरेक वस्तु का आदर और हरेक मानव का सम्मान करो || ये सब भगवान हैं || सज्जन बहोत खुस हुए और साधु को प्रणाम करके उनसे विदा लिया ||
प्रिया मिश्रा

एक कलयुग के सताए हुए सज्जन भगवान् की खोज में निकले घर से बहोत दूर चलने के बाद उनको बड़ी जोर की प्यास लगी , आस पास देखा कुछ दूर पर एक घर था, वह जाकर दरवाजा खटखटाने पर एक महिला आई और उनके आग्रह पर उनको पानी पिलाया || सज्जन फिर निकल चले आगे बढ़ते गए कुछ देर बाद उनको बड़ी तेज भूख आई , उन्होने भिक्छा से अपनी भूख शांत की || अब थके हुए सज्जन बिश्राम करने पेड़ की छाया में पेड़ के पत्ते बिछा के सो गए || जब उठे तो फिर अपनी यात्रा सुरु की || कुछ दूर जाने के बाद उन्हें एक बूढ़ा आदमी मिला जो अपनी बैल - गाड़ी ले जा रहा था , उसने सज्जन की अपनी बैल गाड़ी में बिठा लिया और कुछ उनकी सहायता की यात्रा में , सज्जन फिर आगे बढ़ गए || और चलने लगे , एक दिन सज्जन को रस्ते में एक चमकता हुआ पत्थर मिला सज्जन ने उठाया देखा और बहोत देर सोचने के बाद उसे फेक दिया वो एक गरीब की कुटिया में जा गिरा , वो गरीब उसे देख कर उनको प्रणाम करने लगा , सज्जन बड़े आश्चर्य से उसे देखते हुए आगे बढ़ गए || एक सज्जन को भिक्छा जरा जायदा मिल गयी , सज्जन ने कुछ खाया और फिर उसे किसी और को दे दिया , वो आदमी सज्जन की तरफ देख के प्रणाम कर के बोलै जय प्रभु , सज्जन ने उसकी तरफ भी आश्चर्य से देखा और आगे बढ़ गए ||कुछ दूर चलने के बाद सज्जन को प्यास लग आई और बड़ी तेज भूख भी पर यहाँ कोइ घर नहीं था ये जंगल था , सज्जन ने देखा थोड़ी दूर पे एक नदी बह रही है और एक लगा हुआ केले का पेड़ भी हैं , सज्जन ने वहाँ से केला खाया और पानी पिया || सज्जन महाराज को चलते चलते कई वर्ष निकल गए थे पर उनको भगवन न मिले थे || सज्जन बड़े दुखी हुए और आत्महत्या के लिए नदी ढूंढ़ने लगे , नदी ढूंढते -ढूंढ़ते वो एक नदी किनारे लगे हुए आश्रम में चले गए || वहाँ उन्होंने जाकर एक साधु महाराज से पूछा की आप किसकी साधना करते हैं , साधु महाराज मुस्कुराये और बोले ईश्वर की आराधन करते हैं हम || सज्जन ने उनसे पूछा की क्या आपने ईश्वर को देखा हैं , महाराज मुस्कुराये और उन्होंने बोला हा मैंने देखा हैं || सज्जन बहुत खुस हुए और महाराज से बोले तो प्रभु मुझे भी ईश्वर के दर्शन कराये || महाराज उनको लेकर चल पड़े उसी रस्ते पर जिस रस्ते से सज्जन आये थे , सबसे पहले वही नदी और वो केले का पेड़ आया , सज्जन उसे देख साधु महारज से बोले प्रभु इसी नदी ने मेरी प्यास बुझाई थी और इसी पेड़ की मैंने फल खाया था || साधु महाराज ने कहा देखो सज्जन ये केले के पेड़ ने तुम्हारी भूख मिटाई और इस नदी ने तुम्हारी प्यास बुझाई , ये दोनों ही तुम्हारे लिए अन्नपूर्णा हुई और वो देवी हैं || इन्हे प्रणाम करो वत्स || ये भगवन हैं , वो महिला जिसने तुम्हारी प्यास मिटाई वो भी एक देवी थी , जिस गाड़ीवाले ने तुम्हारी यात्रा में मदद की वो भी भगवन था || उसे प्रणाम करो उसका अभिनन्दन करो || जिसने तुम्हे भिक्छा दी उसे प्रणाम करो वो भगवान् थे उसे प्रणाम करो || जो चमकता हुआ पत्थर तुम्हे मिला था वो हिरा था जो तुमने गरीब की कुटिया में फेका , गरीब ने उसे पाकर भगवन को प्रणाम किया और तुम्हे भी क्युकी उस समाया तुम उसके लिए भगवन थे || जब तुमने उस गरीब को भिक्छा दी उसने तुम्हे प्रणाम किया || इन सारी बातो का एक ही मतलब हैं की भगवान कण - कण में बसते हैं || उन्हें ढूंढो मत हरेक वस्तु का आदर और हरेक मानव का सम्मान करो || ये सब भगवान हैं || सज्जन बहोत खुस हुए और साधु को प्रणाम करके उनसे विदा लिया ||
प्रिया मिश्रा
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