तुमने आकर मेरे ख्याल को
कुछ यु सजा दिया
मेरे ईंट- पत्थरो के मकान को
घर बना दिया !!
जहाँ पहले पड़ी थी
बेजान सी बरतने
उसमे स्वाद जगा दिया
तुमने मेरी ईंट पत्त्थरो के मकान को
घर बना दिया !!
कुछ बिखरा सा पड़ा था
वो पुराना खाली जमीं का टुकड़ा
तुमने उसे कुछ यूँ सजाया
उम्मीद का पुराना वो फुल खिला दिया
मेरे ईंट पत्थरो के मकान को
घर बना दिया !!
मेरी पुरानी यादो की
किताबो में अब
नया पन सा दिखने लगा हैं
ऐसी कौन सी किरण से
तुमने उन्हें भींगा दिया
तुमने मेरे ईंट - पत्थर के मकान को
घर बना दिया !!
पहले मैं था
मेरा अकेला वजूद
खुद को ढूंढता था
तुमने मैं को भुला के
हम बना दिया
मेरे ईंट पत्थर के मकान को
घर बना दिया !!

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