ये न्याय क्यों की करे कोइऔर भरे कोइ | अगर ये न्याय बेवस्था हैं तो बदल डालो | वरना भरने वाला पिस्ता रहेगा |
और एक वक़्त आएगा जब सब कर्जदार होंगे और सब भरेंगे |
पाप को पाप नहीं मारता |
पुण्य को जनम लेना ही पड़ता हैं |
चाहे वो हजार निर्दोष को मार के जनम ले या लाख | लेकिन जितने निर्दोष मरेंगे उतना ही देरी से पुण्य जनम लेगा || और उतनी ही देरी से पापो से मुक्ति मिलेगी ||
विकल्प हमारे पास हैं |
मुक्ति आज या कभी नहीं ||

प्रिया मिश्रा :)

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