मुझे राह के पत्थर ने
जितना सीखा दिया
ये जरा परेशां कर देगी आपको
की पत्थरो का आना
मेरे स्वभाग्य था
और खाली  रास्ता
मेरे लिए दुर्भाग्य था ||
तभी समझ में आया
 दिन
 समय
और वर्ष
सबके लिए एक से नहीं होते
बदल जाते हैं
और अलग हो जाते हैं ||


प्रिया मिश्रा :)

 

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