मैंने शाम के समंदर को
रात के दरिया में बहा के
सुबह के झरनो में
खेलते हुए
दिन का सूरज देखा हैं
और रात के आँचल में
सूरज को दुबकते भी देखा हैं
ये वक़्त हैं
इसे हर रोज
खुद के साथ खेलते देखा हैं ||
प्रिया मिश्रा :)
रात के दरिया में बहा के
सुबह के झरनो में
खेलते हुए
दिन का सूरज देखा हैं
और रात के आँचल में
सूरज को दुबकते भी देखा हैं
ये वक़्त हैं
इसे हर रोज
खुद के साथ खेलते देखा हैं ||
प्रिया मिश्रा :)
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