डरना छोड़ दे

या तो जित के आयंगे
या हार जायँगे
ये खेल हैं
जीवन का
डरना छोड़ दे ||

डरना छोड़ दे |
हम जीवन में आधे समय डरते रहते हैं और इसी डर  में सारी गलतिया करते हैं |  किसी गुलामी, एक डर का नतीजा हैं | किसी को धमकाना, एक डर  का नतीजा हैं | जो आपको धमका रहा हैं वो खुद किसी वजह से डरा हुआ हैं | तो उससे क्या डरना जो  खुद ही डरा हुआ हैं |  हमारा समय भी डरा हुआ होता हैं तभी तो हमें डरता हैं
ताकि हम डर  के गलतिया करे और वो मजा ले | दरहसल समय किसी को भी खुद से आगे नहीं जाने दे सकता
यही उसका डर हैं | वो सोचता हैं अगर इसको डरा दूंगा तो ये गलतिया करेगा और मुझसे पीछे हो जायेगा |
तो डरे नहीं डट के मुकाबला करे | सारी शक्तिया आपके अंदर हैं | शिव भी हैं शक्ति  भी हैं | आप आपके पूरक हैं, खुद को पहचाने | आप खुद के आइना  हैं जो देखोगे वही होगा | डर देखोगे , डर  दिखेगा | तो डर  पे विजय पाओ | जैसा मैंने पहले कहा हम खुद के आईना हैं | हम जो देखते हैं हमें वही मिलता हैं , जैसे कमजोर आदमी कमजोर आदमी को आकर्षित करता हैं , पापी - पापी को आकर्षित करता हैं | और पुण्य , पुण्य को आकर्षित करता हैं | बुरा समय बुरे लोगो आकर्षित करता हैं , और अच्छे लोगो को हमारे जीवन से निकल देता हैं | कमजोर वक़्त कमजोर लोगो को हमारी और आकर्षित करता हैं | क्युकी हम डर जाते हैं |
तो डर  पर विजय पाए |
आपका डर ही आपकी हार हैं ||

प्रिया मिश्रा :)

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