मेरे पास ऐसा जमीं हैं जिसके कण - कण में काँटे हैं |
मेरा एक कदम हजार घाव देता हैं |
लहू के निशान से एक और कुरुक्षेत्र का जन्म हुआ हैं |
और इस कुरुक्षेत्र में पांडव की भूमिका में मैं हूँ |
और कौरवो की भूमिका में वक़्त हैं |
कृष्ण मेरे अनुभव हैं |
जितनी पूछती हूँ उतने ही जवाब देते हैं |
वो निहथे हैं |
वो धर्म हैं |
फिर वक़्त कितना भी मजबूत हो
वो हारेगा ही |
क्यूंकि वो कौरव हैं
वो अधर्म हैं ||
प्रिया मिश्रा :)
Nice poam
ReplyDeletethank you g :)
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