जब आप सुबह निकलते होंगे अपनी बहोत ही व्यस्त कार्यकाल के लिए | आपको कभी रस्ते में एक चाय वाला मिला होगा | वो भी निकला होगा आज कुछ बिक जाएगी चाय तो घर की नई जरूरतों की चीजे लाऊंगा |
कोइ अँधा रास्ता पार करता हुआ दिखा होगा | बसे भागती  हुई दिखी होंगी | दुकाने मुस्कुरा का आपका इन्तजार कर रही होंगी | मंदिर की घंटिया आपको आकर्षषित करती होंगी |  कही से चाय समोसे की खुसबू आती होंगी |
कोइ खिलौने बेचता मिला होगा | रस्ते में झगड़ते  हुए लोग भी मिले होंगे | नालियों की बदबू भी मिली होंगी |
कोइ रोता  हुआ भी दिखा होगा | किसी पुराने दोस्त ने भी आवाज दी होगी | कोइ आपसे रूठ के नजरे चुरा के बैठा होगा | कोइ आपका इन्तजार करता होगा | किसी ने आपका मजाक उड़ाया  होगा | रोज हजारो बातें हुई होंगी | लेकिन आप नहीं रुके होंगे | आप अपने कार्य में व्यस्त रहे होंगे | फिर आजा कोइ छोड़ के चला गया तो क्यों रुक गए | जाने वाले को क्यों याद करने लगे | कल यही आपके एक मित्र के साथ हुआ था तो आपने कहा था |  होता है यार जाने दे | नई मिल जाएगी | जिंदगी थोड़ी न ख़तम हुई हैं | फिर आपकी जिंदगी कहाँ   ख़तम हो गयी | आपको भी तो नए लोग मिल जायेंगे |
एक बुरा सपना  देखने से कोइ सोना नहीं छोड़ देता |
एक बार गिरने से कोइ चलना नहीं छोड़ देता
एक बार हसी ना आये तो लोग चुटकुले सुनना नहीं छोड़ देते
एक बार फ़ैल हो जाने पर कोइ पढ़ना नहीं छोड़ देता
तो किसी के जाने पर लोग जीना क्यों छोड़ देते हैं ||

लाइफ हैं यार कल फिर आएगा कोइ
एक उम्मीद लेके
तू दिल के दरवाजे खुली रख
बंद दरवाजो में जाले लग जाते हैं
और बंद तालों मे जंग लग जाता हैं ||

प्रिया मिश्रा :)

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