परिणय

परिणय कोइ  बंधन नहीं
एक वादा हैं |
एक साथ खुद को साँझा करने का
कसम लिया जाता हैं
वो परिणय हैं ||
परिणय कोइ बंधन नहीं
एक वादा हैं ||

परिणय एक बिस्वाश हैं
खुद को और जानने
की एक प्रथा हैं
ये दिल को टटोलने का
एक बहाना  हैं
परिणय कोइ बंधन नहीं
एक वादा हैं ||

इस साथ में कोइ किसी का खास हो जाता हैं
एक हल्का पतला धागा जुड़ता हैं
और धीरे - धीरे वो गहरा हो जाता हैं
जो कल तक पराया हैं
वो अपना हो जाता हैं
 कुछ अधूरा
को पूरा करने का
एक ताउम्र चलने वाला
एक प्रयाश हैं
परिणय कोइ बंधंन नहीं
एक वादा  हैं ||

यहाँ शब्दों का कोइ मोल नहीं
यहाँ जज्बातो को आगे किया जाता हैं
एक थक जाये तो
दूसरा उसे गले लगा लेता हैं
ये  सामजिक नहीं
ये आत्मिक रिस्ता हैं
परिणय कोइ बंधन नहीं
एक वादा हैं ||

इसमें किसी का सवाल करना
एक प्रेम दिखाता हैं
किसी को किसी को खोने का डर ही
तो प्रेम कहलाता हैं
परिणय में अपना अच्छा
बाद में आता हैं
वो अजनबी दिल को
इतना भाता हैं
इसमें कोइ ऊपर नहीं आता हैं
ये बराबरी का एहसास दिलाता हैं
परिणय कोइ बंधन नहीं
एक वादा  हैं ||

डर को दूर करदे वो आपका साथी
आपका जीवन भरआपका
साथ निभाता हैं
जो गुजर कर भी
यादो में सिमट जाता हैं
ये एहसास सिर्फ परिणय से आता हैं
इसलिए ,
परिणय कोइ बंधन नहीं
एक वादा  हैं ||

प्रिया मिश्रा :)


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