मैं अकेला चला था
लेकिन अकेला कहाँ हूँ ||

सड़को का मिलना
सड़को का मुड़ना
बदलाव लेके आया

एक गाँव को छोड़ा
दूसरा गावँ मुस्कुरा के आया
उसने बड़े प्यार से गले लगाया

आगे बढ़ा
साथ - साथ
पेड़ो का करवा चलता रहा
हवा  छू के गुजरती रही
कदमो का साथ धूल ने  निभाया

मैं चलता रहा
और मेरे कदमो ने एक गाँव की
मिटटी को दूसरे गाँव से मिलाया ||

दोनों एक ही थे
जिन्हे रंग - रूप ने  बाट  रखा था
ये लोग थे जिन्होंने अलग गाँव बना रखा था ||

लोगो का सिलसिला ख़तम हुआ
अब नदिया साथ थी
पर्वत साथ थे
चिड़ियों  का झुण्ड
कुछ दूर चला था
और साथ - साथ मेरे
मेरा सपनो का जहाँ चलता रहा ||

मैं अकेला चला था
लेकिन अकेला कहाँ हूँ ||

प्रिया मिश्रा :) :)


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