एक पुराना  खत

एक पुराना  खत मिला
 पुराने अलमारी के
पुराने से संदूक में बंद था
पुरानी चीजों के साथ बंद वो
पुराना ख़त पिले रंग का हो गया था
जैसे उसे धुँआ खा गया हो
उसे आग लगी हो
लेकिन जल न पाया हो
वो समेटे था
एक तड़प एक आह
एक समर्पण
और एक बिस्वाश
एक रिश्ते को समेटे था
ये पुराना खत
एक चोट को छिपाये था
एक राज थी जो शब्दों में छिपी थी
जिसमे पहले शब्द थे
मेरी
और आखरी
तुम्हारा
आगे के शब्द मिट गए थे
और मिटे  हुए शब्दों के
साथ रिश्ते भी धुंदले हो गए थे
जाने कौन थी
मेरी
और जाने कौन था
तुम्हारा ||

प्रिया मिश्रा :)
 

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