एक खाली घर इन्तजार करता हैं | 
और भरे घरो में बरतने खड़कते हैं |
 ये सदियों से चला आ रहा हैं
 एक प्रचलन की तरह  |
  ये छूटते हाथ इतिहास हैं |
  आदर्श नहीं ||

 प्रिया मिश्रा :)
 

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