मेरे मिट्टी  के मकान को |
कोइ तो स्नेह की हवा छू जाएगी |
कोइ तो फूल होगा जो इसे गुलिस्तां बना जायेगा |
कोइ तो होगा जो इस गिरते मकान को |
घर बना देगा ||

प्रिया मिश्रा :)

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