पुनर्जन्म

आंधी आये
तूफ़ा आये
अब तो पर्वत को पिघलना होगा
पुनर्जन्म तो लेना होगा ||

चली आ रही हैं जो घडी
उस घडी को बदलना होगा
समय अब चाल बदलेगा
दिशाओ को भी संभालना होगा
पुनर्जन्म तो लेना होगा ||

ये आग अब जलती रहेगी
रात को दिन
दिन को रात में ढलना होगा
पुनर्जन्म तो लेना होगा ||

मरना जीना तय हैं
दो धारी  तलवार की अब सिने पे नहीं झेलेंगे
कहा सुनी बहोत हुई
अब तो बिगुल
सगुन का बजना होगा
पुनर्जन्म तो लेना होगा ||

प्रिया मिश्रा :)

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