मेरी कलम की स्याही में छिपा तेरे लिए वो प्रेम रोज पन्ने पर उतर जाता था |
और तेरी यादें बारिश की तरह  आती थी | और वो मेरा प्रेम का मासूम सा पन्ना फिर से कोरा हो जाता था |


प्रिया मिश्रा :)

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