प्रेम

प्रेम एक ऐसा बीज हैं जो
वक़्त के साथ सींचता हैं और घना पेड़ बन के लहलहाता हैं |
फिर उस से जो फूल झरते हैं वो आपके आँगन में गिरते हैं |
और कई पीढ़ियों तक वो आँगन महकता रहता हैं ||

प्रिया मिश्रा :)

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