शाम पिघल कर पहले गुलाबी हुआ | फिर  पिघला मटमैला हुआ | और अब रात में बदल गया | ये गुजरा नहीं बदल गया | कल रात बदल जायेगा | और फिर सुनहरी सुबह हमारा स्वागत करेगी | हम फिर से जन्म लेंगे |
एक नए कल में | और आज का कल कहानी बन जायेगा |
तो अच्छा करे की कहानी अच्छी हो |
अच्छा बोले ताकि कहानी के शब्द सुद्ध हो और आत्मा में घुल जाये |
चारो तरफ शांति हो |
चारो तरह प्रेम हो |
और हम कल फिर गुलाबी शाम देख पाए |
और परसो फिर एक कहानी बने |
और हम धीरे - धीरे सुनहरे पन्नो का इतिहास बनाये |

जय हिन्द |
जय भारत |

प्रिया मिश्रा :) 

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