मैंने जिस बेटे के नाक तक साफ़ किये
जिसके छोटी से छोटी जरूरतों का ख्याल मैंने रखा
वो बेटा मुझे कहता हैं
माँ तू बोझ हैं चली जा ||
माना  मैंने एहसान नहीं किया
मेरा स्वार्थ था वहाँ
मेरा बेटा था कैसे छोड़ देती
पर उस स्वार्थ का इनाम मुझे
देश निकला देके मिला हैं
हैं न बड़ा इनाम
जिसपे हर माँ गर्व करे ||

प्रिया मिश्रा :)

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