रहने दो आगे की बातें

रहने दो आगे की बाते
उनमे क्या वक़्त गुजारना

जो कल साथ था वो तो बहाने करने लगा हैं
ये वक़्त ऐसा चला हैं
कछुआ भी शेर को
आँखे दिखने लगा हैं ||

जिसमे कोइ गति नहीं
वो चलायमान होने की सलाह दे के जाता हैं
वो झरता पत्ता
भी मुस्कुरा के अस्तित्वा बताता हैं
ये वक़्त हैं
प्यारे ये कभी भी
बदल जाता हैं ||

बाते चलती हैं
और
चलती ही रहती हैं
कायरो ने मेरे नाम का ब्यूरो खोल रखा हैं
मैंने पैसे नहीं दिए
फिर  भी मेरे चर्चे करते हैं
वो शुमार हो गए
मेरे बुरे वक़्त में
और मैं आधा बुझा दिया भी
दुसरो के अंधियारे का कारन बना

अब इस से ही जान लो कितनी आग लेके मैं चलता हूँ
बुझ गया हूँ
फिर भी हाथ सेकने वाले सेक रह हैं
वक़्त इतना भी बदला हो
शेर ,
शेर ही रहता हैं
ये वक़्त हैं प्यारे कभी भी
किसी का भी बदल सकता हैं ||

रहने दो आगे की बाते
उसमे क्या वक़्त गुजरना हैं ||

प्रिया मिश्रा :) :)

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