"इतने सादा हैं, बैठे हुए हैं खिड़की पर.."
की लगता हैं , चाँद फलक पर
पूरा हुआ सा हैं
कोइ अमावश की रात में
अपनी सादगी का
इस तरह नमूना पेश करता हैं
की चाँद भी ग़ज़ल लिखने को
अमावश में दिखा करता हैं !!
हैरान हूँ
मैं क्या कहुँ
की उनकी शादगी के चर्चे
इतने हैं ,
हर गली में
उनके दीदार को मेला लगा करता हैं !!
मैं अकेला दीवाना नहीं
मैं अकेला आशिक नहीं
की उसकी शादगी के
चर्चे में पूरा कायनात हुआ करता हैं !!


प्रिया मिश्रा :)

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