इंसानियत मरती जा रही हैं ||

इंसान "इंसान " को भूलता जा रहा हैं
बिस्वाश की डोर अब टूटती जा रही हैं
इंसानियत मरती जा रही हैं ||


अब सर्दी में बारिश होती हैं
गर्मी में सर्दी लगती हैं
और सर्दी में धुप कड़ाके की होती हैं
प्रकीर्ति भी अब बदलती जा रही हैं
इंसानियत मरती जा रही हैं ||

लोग किसी का बदला किसी से लेते हैं
तानो से मासूम लोग मारे जाते हैं
मासूमियत अब खंजर लिए घूमते फिरती हैं
इंसानियत मरती जा रही हैं ||

धर्मो के नाम पर अब
रोज नए खेल खेले जाते हैं
तलवार उठते ही कई सर गिर जाते हैं
अब कोइ किसी का भाई नहीं
अब कोइ किसी की बहन नहीं
अब अँधेरा आगे बढ़के
उजाले की मासूमियत छीनते जा  रहे हैं ||
इंसानियत अब मरती जा रही हैं ||

प्रिया मिश्रा :)

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