एक पंछी अपने टूटे पंखो के साथ कहाँ तक जाएगी
जब भी हवा रुख मोड़ेगा
वो फिर से गिर जाएगी ||

वो साहसी हैं लड़ेगी
ठोकरे खायेगी
लेकिन कब तक
कोइ तो
वक़्त भेड़िया होगा
जो उसे निगल जायेगा

प्रिया मिश्रा :)

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