जितनी बार मुझे नाकारा जायेगा
जितनी बार मेरा तिरस्कार होगा
 जितनी बार मुझे दोहरे तराजू में तोला  जायेगा
उतनी बार मेरा नया जनम होगा |
मैं कुचल जाने पर भी
कुछ अंस  खुसबू के छोड़ ही जाउंगी
मैं फ़ूल  हूँ
मैं फिर उग आउंगी ||

प्रिया मिश्रा ||

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