'दिन है तू, रात मैं
मिलें कहाँ, कोई कहे'
नदी कहाँ किनारे से मिलती हैं
टकराती हैं लौट आती हैं
किनारा हैं तू , नदी मैं
मिले कहाँ , कोइ कहे ||
तू चाँद सी चमकती हैं
मैं सूर्य हूँ , तपता हूँ
तू शीतल हैं
मैं जलता हूँ
चाँद हैं तू , सूर्य मैं
मिले कहाँ, कोइ कहे '
एक दिन साँझ बन कर ढल जायेंगे
फिर मिलेंगे
कही और किसी
और जगह
जहाँ न तू दिन होगा न मैं रात
होंगे ,
मैं मोती , तू धागा होगी ,
मिल के प्रीत की माला बनाएंगे
कुछ इस तरह एक नया
प्रेम हम जगायेंगे ,
मैं दीपक तू बाती बनना
तू सुर मैं ताल बनूँगा
मिलेंगे आज नहीं
अभी नहीं
इस जनम नहीं
कही और किसी और जनम में
तब ये न होगा
मिले कहाँ , कोइ कहे ,
प्रिया मिश्रा :)
मिलें कहाँ, कोई कहे'
नदी कहाँ किनारे से मिलती हैं
टकराती हैं लौट आती हैं
किनारा हैं तू , नदी मैं
मिले कहाँ , कोइ कहे ||
तू चाँद सी चमकती हैं
मैं सूर्य हूँ , तपता हूँ
तू शीतल हैं
मैं जलता हूँ
चाँद हैं तू , सूर्य मैं
मिले कहाँ, कोइ कहे '
एक दिन साँझ बन कर ढल जायेंगे
फिर मिलेंगे
कही और किसी
और जगह
जहाँ न तू दिन होगा न मैं रात
होंगे ,
मैं मोती , तू धागा होगी ,
मिल के प्रीत की माला बनाएंगे
कुछ इस तरह एक नया
प्रेम हम जगायेंगे ,
मैं दीपक तू बाती बनना
तू सुर मैं ताल बनूँगा
मिलेंगे आज नहीं
अभी नहीं
इस जनम नहीं
कही और किसी और जनम में
तब ये न होगा
मिले कहाँ , कोइ कहे ,
प्रिया मिश्रा :)
Bahut khub
ReplyDeletethank you g :)
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