रह गया वो पथिक वहाँ
जहाँ से वो चला था ||

रह गया वो अकेला  जो
एक भीड़ लेके चला था ||

ले गयी बहा के हवा भीड़ को
किसी दूसरे किनारे  ||

वो दूर  खड़ा देखता रह गया
उसके कदमो में बेड़िया लग गयी
और
शाम तक तनहा रह गया ||

ऐसा हुआ क्यों
क्यों कर वो तनहा रह गया ||

एक सवाल उसने पूछा खुद से
और जवाब बड़ा भिन्न था
सबसे
वो भाग्य के भरोसे बैठा रहा वहाँ
जब लोग कर्म कर रहे थे
वो हस्ता रहा दुसरो पे
उसने एक पग भी कर्मा के न रखे

वो भ्रम में रहा ,
आँखों पे उसकी पट्टी सी थी
दिखा नहीं लोग गुजर गए
कारवां लेके

और वो
वो पथिक
रह गया वहाँ वो पथिक
जहाँ से वो चला था ||

प्रिया मिश्रा :) :)

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