ये हौसलों की उड़ान हैं

ये हौसलों की उड़ान हैं
ये रुकेगी नहीं ||
पाँव थक जाये अगर
छाले आ जाये अगर
पथरीले रास्ते हो
ये रुकेगी नहीं
ये हौसलों की उड़ान हैं ||

चमकनी हैं बिजली चमक जाये
घटा को फटना हैं फट  जाये
चाहे राह कितने भी पथरीले हो
चलते चले जाना हैं
ये रुकेगी नहीं
ये हौसलों की उड़ान हैं ||

वक़्त शातिर हैं कुछ तो
शादीश कर रहा होगा
कुछ न कुछ उसके मन में भी चल रहा होगा
वो रोकेगा , पथ से
पथिक तू  हटना मत
तेरा ईश्वर तेरे साथ हैं
तू चलता रह
तू नहीं रुकेगा
तू नहीं थकेगा
ये रुकेगी नहीं
ये हौसलों की उड़ान हैं ||

तू अभिमन्यु बन जा
अपने हाथ से वक़्त का पहिया घुमा
सारे बाधा रूपी कौरव मारे  जायेंगे
तू हिम्मत दिखा
चाहे चक्रब्यूह कितना भी बड़ा हो
तुझे कोइ न रोक पायेगा
तू बिजेता बन के आएगा
तू रुक मत
तू थक मत
ये रुकेगी नहीं
ये हौसलों की उड़न हैं ||

धुप तेज होगी
हवाएं भी अपना रुख बदलेंगी
दिशाएँ मूड  जाएँगी
चांदनी रूठ  जाएगी
तू रुक मत
तू थक मत
ये रुकेगी नहीं
ये हौसलों की उड़ान हैं ||

कुछ रूठ  जायेंगे
कुछ छूट जायेंगे
कुछ बातें करेंगे
कुछ हसीं  उड़ाएंगे
कुछ बातें होंगी
कोइ तुझे छेड़  जायेगा
कोइ प्रलोभन जरूर आएगा
तू मत आ इसमें
तेरा ध्ये अटल हैं
तू थक मत
तू रुक मत
ये रुकेगी नहीं
ये हौसलों की उड़ान हैं ||

 मन तेरा भी भटकेगा
 राहें भी कभी गलत मूड जाएँगी
 लेकिन सही राह तुझे  दिख ही जाएगी
 अपना राह प्रशस्त कर
 तेरी मंजिल तय हैं
 तू थकेगा नहीं
 तू रुकेगा नहीं
 ये रुकेगी नहीं
 ये हौसलों की उड़ान हैं ||

बाधा आएगी बहोत
हर मोड़ तेरा इम्तहान लेगा
तू डर  मत
तेरा ईश्वर तेरे साथ हैं
तू आगे बढ़ता चल
तू रुक मत
तू थक मत
ये रुकेगी नहीं
ये हौसलों की उड़ान हैं ||

तू अर्जुन हैं
मछली की आँख को
लक्ष्य बना
उठा तीर अपने
 हौसलों का
चल अब निशाना लगा
 तू चुकेगा नहीं
 तू थकेगा नहीं
 ये रुकेगी नहीं
 ये हौसलों की उड़ान हैं ||

युधिष्ठिर  की तरह स्थिर रह
सोच पे आने काबू पा
अभी वक़्त सम्भलने  का हैं
तू भटकता चला न जा
तू रुक मत
तू थक मत
ये  रुकेगी नहीं
ये हौसलों की उड़ान हैं   ||

शाम ढलती हैं तो ढल जाने दे
रात ठहरती हैं हैं तो ठहर जाने दे
तेरा सूर्य तेरे साथ हैं
तुझे चिरागो की जरुरत नहीं
तेरा ईश्वर तेरे साथ हैं
तू चमकेगा
सारे अँधेरे
भागते चले जायेंगे
तेरे कदम नाप लेने
तेरी मंजिल की दुरी को
तू रुक मत
तू थक मत
ये रुकेगी नहीं
ये हौसलों की उड़ान हैं

राह के पथरो को हटाता चल
तू पथिक बन
अपने पाथ बनता चल चल
तेरे पाँव खाली  हैं
दुखी न हो
ये लहुं तेरे
तेरे कदमो के निशान छोड़ जायेंगे
कल बहोत तेरे
कदमो के निशान को ढूंढ़ते हुए आएंगे
कई लोगो के लिए
तेरे ,
कदमो का लहू ही
मंजिल बन जायेगा
तू रुक मत
तू थक मत
ये रुकेगी नहीं
ये हौसलों की उड़ान हैं

जय हिन्द
जय भारत

प्रिया मिश्रा




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